आँखें बंद करती हूँ जब भी
सहेजने को जो सब है मेरा
न जाने कहाँ से पर तभी
सुकून दे जाता है एहसास तेरा
न मैं खुद को जानती थी, न तुझे
पर तेरा अस्तित्व पूरा कर जाता है मुझे
एक पागल सा ,नटखट सा दिल था मेरा
होठों पे बड़ी सी हंसी लिए तलाश थी
बस एक हंसी की जो पूरा करदे मुस्कुराना मेरा
जानती नहीं तुझे कुआ कहूँ
रिश्ता क्या है तेरा मुझसे
एक शरारती साथी या दोस्त कहूँ
हमराज कहूँ या प्यार कहूँ
जानती हूँ बस इतना
इन रिश्तों से ऊपर है तू
हंस देता है मेरी एक हंसी पर
एक अश्क पे रो देता है
जो बात कह ना खुद से
तू ना जाने कैसे जान लेता है
इस ज़िन्दगी ने हर कदम पर
सुख तो नहीं दिए,पर
इतना रहम कर गयी
हर गम मैं तुझे मेरे साथ कर गयी....
